Covid-19: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने बताया नए वैरिएंट का अनुमान

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कोरोना वायरस Covid-19 के नए रूपों का संकेत: JN.1 वेरिएंट ने मचाया हलचल

कोरोना वायरस Covid-19 का कहर दुनियाभर में बढ़ रहा है, और इसके नए वेरिएंट्स चिंता का कारण बन रहे हैं। नवीन JN.1 वेरिएंट ने अपने आगमन से हलचल मचा दी है। इसके साथ ही, एक नई रिसर्च में आर्टिशियल इंटेलिजेंस के एक नए मॉडल ने covid-19 के नए वेरिएंट्स को पहले से ही अनुमान लगा सकता है। आइए जानें इस नई खोज के बारे में!

मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) की रिसर्च: एक नया दृष्टिकोण

अमेरिका के प्रमुख विज्ञान संस्थान, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के शोधकर्ताओं ने एक नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल विकसित किया है। इस मॉडल के अनुसार, यह एक हफ्ते के अंदर दुनियाभर में कोविड-19 वेरिएंट्स की गणना करके उन्हें 73% तक और दो हफ्तों के बाद 80% से अधिक तक पहचान सकता है।

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स्टडी का विवरण

मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और इजराइल के ‘द हिब्रू यूनिवर्सिटी-हादासाह मेडिकल स्कूल’ की टीम ने ग्लोबल इनिशिएटिव ऑन शेयरिंग एवियन इन्फ्लुएंजा डेटा (GISAID) से 30 देशों से लाखों नमूने कलेक्ट किए। इसमें SARS- COV-2 वायरस के 90 लाख नमूनों की जेनेटिक सीक्वेन्स का विश्लेषण शामिल था।

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रिसर्च के परिणाम

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मॉडल की मदद से इन्फ्लूएंजा, hCoV-19, रेस्पिरेटरी सिंकाइटियल वायरस (RSV), एचएमपीएक्सवी के साथ-साथ चिकनगुनिया, डेंगू और जीका समेत अन्य मच्छर या कीटों से पैदा होने वाले वायरस से डेटा को तेजी से साझा करने में मदद मिलेगी।

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मॉडल का कामतंत्र

यह रिसर्च का दावा है कि मॉडल अगले तीन महीनों में दुनियाभर में 10 लाख लोगों में से कम से कम 1000 लोगों को संक्रमित करने वाले 72.8% वेरिएंट्स का पता लगा सकता है। और इसके लिए केवल एक हफ्ते के ऑब्जर्वेशन पीरियड की आवश्यकता है।

भविष्य की संभावना

यदि ऑब्जर्वेशन पीरियड को बढ़ा दिया जाए, तो वेरिएंट्स का पता लगाने की दर 80.1% तक बढ़ सकती है। शोधकर्ता इस दिशा में और अधिक रिसर्च कर रहे हैं, ताकि इस मॉडल को इंफ्लुएंजा, एवियन फ्लू वायरस समेत अन्य रेस्पिरेटरी वायरस के लिए भी इस्तेमाल किया जा सके।

समापन

इस नए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल से हमें कोविड-19 के नए रूपों का त्वरित और सटीक पता चलने में एक नई उम्मीद मिलती है। इससे हम सकारात्मक कदम उठा सकते हैं और समुद्र से जल्दी निकल सकते हैं।

FAQs:

क्या यह मॉडल सभी वायरसों के लिए लागू हो सकता है?

हाँ, इस मॉडल की गई स्टडी के अनुसार, इसे विभिन्न वायरसों की पहचान में सफलता मिली है।

क्या यह स्टडी सभी देशों के लिए उपयुक्त है?

जी हां, इस स्टडी में 30 देशों से नमूने लिए गए हैं, जिससे विश्वभर में विभिन्न संक्रमणों का अध्ययन किया गया है।

कैसे यह मॉडल वेरिएंट्स का पता लगाता है?

यह मॉडल जेनेटिक सीक्वेन्स का विश्लेषण करके वेरिएंट्स की संख्या का अनुमान लगाता है।

क्या इसमें निरंतर अपडेट होते रहने की क्षमता है?

हाँ, इसमें नए डेटा के साथ अपडेट होने की क्षमता है, जो इसकी सटीकता को बनाए रखती है।

क्या यह मॉडल सिर्फ कोविड-19 के लिए है?

नहीं, इसमें इन्फ्लूएंजा, hCoV-19, RSV, चिकनगुनिया, डेंगू, और जीका जैसे वायरसों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

क्या इस मॉडल का उपयोग स्वास्थ्य निगरानी में किया जा सकता है?

हाँ, इस मॉडल का उपयोग स्वास्थ्य निगरानी में किया जा सकता है। यह नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल कोविड-19 के नए वेरिएंट्स को पहचानने में मदद कर सकता है और स्वास्थ्य प्रणालियों को सुरक्षित रखने के लिए त्वरित निर्णय लेने में मदद कर सकता है। इसके माध्यम से विभिन्न वायरसों और इन्फेक्शन्स के वेरिएंट्स को पहचाना जा सकता है, जिससे संगरोध और नियंत्रण में सुधार हो सकता है।

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