3 Wondrous Ways Black Holes Shape Our Universe

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Introduction

ब्लैक होल(Black Hole) का सिद्धांत सितारों के विकास के अंत में आकस्मिक गिरावट की श्रृंखला से निकलता है। ब्रह्मांड के विशाल सागर में, ब्लैक होल को अद्वितीय और विचित्र घटनाएँ मानी जाती हैं। इनकी अद्वितीय गुरुत्वाकर्षणीय शक्ति के कारण, ब्लैक होल (Black Hole) एक ऐसा क्षेत्र होता है जहाँ प्रकाश भी नहीं बच सकता। सोचिए एक ऐसी स्थली जहाँ भौतिकी के नियमों का अस्तित्व संभव नहीं हो, और एक गुरुत्वाकर्षणीय बल हो जो ब्रह्मांड को विकराल रूप में खींचता हो।

ब्लैक होल(Black Hole) क्या है?

ब्लैक होल (Black Hole) एक ऐसा खगोलिक द्रव्यमान है जिसमें गुरुत्वाकर्षण इतना शक्तिशाली होता है कि इसमें फंसी हुई किसी भी वस्तु, चाहे वह प्रकाश हो या कुछ और, से बाहर नहीं निकल सकती। इसका मुख्य विशेषता है कि जब कोई पदार्थ इसकी सीमा या ‘घटना सीमा’(Event Horizon) पार करता है, तो वह इस ग्रहणी में स्वीकार्य नहीं होता और अनंतर, इसके अन्दर खींच लिया जाता है।

ब्लैक होल (Black Hole) कहा होता है?

ब्लैक होल हर जगह हो सकता है जहाँ अन्य वस्तुएँ होती हैं, पर इसका पता लगाना आमतौर पर बहुत मुश्किल होता है। ब्लैक होल सामान्य रूप से सितारों के आस-पास बनता है, खासकर जब वे अपने जीवन के अंत में गुरुत्वाकर्षणीय पतन(Gravitational pull ) का अनुभव करते हैं। हालांकि, यहाँ तक कि गैलेक्सी के केंद्र में भी बड़े अद्भुत ब्लैक होल होते हैं। ब्रह्मांड में बहुत सारे ब्लैक होल हैं, लेकिन बहुत से ऐसे भी हो सकते हैं जो हमें अभी तक पता नहीं हैं।

ब्लैक होल: एक अद्भुत चीज़ और उनके 4 प्रकार

Black Hole With Event Horizon

ब्लैक होल कैसे बनते हैं?

ब्लैक होल (Black Hole) एक ऐसा खगोलिक द्रव्यमान है जिसमें गुरुत्वाकर्षण इतना शक्तिशाली होता है कि इसमें फंसी हुई किसी भी वस्तु, चाहे वह प्रकाश हो या कुछ और, से बाहर नहीं निकल सकती। इसका मुख्य विशेषता है कि जब कोई पदार्थ इसकी सीमा या ‘घटना सीमा’(Event Horizon) पार करता है, तो वह इस ग्रहणी में स्वीकार्य नहीं होता और अनंतर, इसके अन्दर खींच लिया जाता है।

तारों में विशाल तारे( Giant Stars) जब अपने जीवन की अंतिम धारा में पहुंचते हैं। जब वे अपनी परमाणु ऊर्जा को खत्म कर देते हैं, तो आकाश में एक आकर्षक दरवाज़ा चालू हो जाता है। हर क्षण, तारे के अंदर की गतिविधियां (Activities) बढ़ती हैं, जिससे आकाश में चार्ज युक्त कण (Electromagnetic Pulse) उत्सर्जित होते हैं।

जैसे तारे की ऊर्जा कम होती जाती है, वह आकाशिक नृत्य ( Astronomical Event) में अधिक चुस्त बनता जाता है। इस सेलेस्टियल नृत्य का अंत ब्लैक होल के निर्माण से होता है ,एक ऐसी अद्वितीय सीमा, जिसमें ना केवल प्रकाश बल्कि विज्ञान की प्राचीन नियमों की भी उलझन है।

इस अद्भुत खगोली नृत्य (Astronomical Event)में, जब एक तारे का अंतिम अध्याय समाप्त होता है, तो ब्लैक होल उभरता है , जहाँ हमारी समझ की सीमाएं सदैव परीक्षण में रहती हैं।

ब्लैक होल कैसे काम करता है?

ब्लैक होल का काम करना एक अद्वितीय और विस्मयकारी प्रक्रिया है जो गुरुत्वाकर्षण (Gravity) के अद्भुत और तीव्र बल पर आधारित है

  1. घटना सीमा (Event Horizon) : ब्लैक होल की सबसे बाहरी रेखा को “घटना सीमा” कहा जाता है। जब कोई वस्तु इस सीमा को पार करती है, तो वह ब्लैक होल के अंदर खींच ली जाती है।
  2. सिंगुलैरिटी: ब्लैक होल के केंद्र में सिंगुलैरिटी होता है, जो एक अत्यंत घना बिंदु है जहाँ गुरुत्वाकर्षण बेहद तीव्र होता है।
  3. गुरुत्वाकर्षण: इस घने बिंदु के कारण, ब्लैक होल अपने आसपास के सभी पदार्थों को आकर्षित करता है, जिससे वे इसकी ओर खींचे जाते हैं।
  4. प्रकाश का अभाव: ब्लैक होल इतना गहरा होता है कि उसमें फंसे हुए पदार्थों से प्रकाश भी नहीं बाहर निकल सकता। इसलिए, ब्लैक होल को “काला” होल भी कहते हैं।

ब्लैक होल की पहली तस्वीर

ब्लैक होल की पहली सीधी तस्वीर 10 अप्रैल, 2019 को सार्वजनिकता में प्रकट की गई थी। इस ऐतिहासिक तस्वीर को इवेंट होराइज़न टेलीस्कोप (EHT)जैसी टेक्नोलॉजी का उपयोग करके कैप्चर किया था, जो विश्व के विभिन्न स्थानों पर फैले आठ भू-आधारित रेडियो टेलीस्कोपों का एक नेटवर्क है। इस ब्लैक होल का स्थान मेसियर 87 (M87) गैलेक्सी के केंद्र में है, जो पृथ्वी से लगभग 55 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर है। यह ब्लैक होल खुद सूर्य से लगभग 6.5 अरब गुणा भार वाला है। तस्वीर में एक चमकदार अंगूठी जैसा स्ट्रक्चर दिखाई दिया, जिसके केंद्र में एक गहरा काला केंद्र है, जो अल्बर्ट आइंस्टीन के सामान्य प्रतिबिंबना सिद्धांत के अनुसार एक ब्लैक होल की घटना सीमा से संगत है।

ब्लैक होल के प्रकार

ब्लैक होल के मुख्य 4 प्रकार होते हैं जो उनकी गुणधर्मों और उत्पत्ति के आधार पर अलग होते हैं।

  1. स्टेलर ब्लैक होल (Stellar Black Holes): ये वह ब्लैक होल होते हैं जो स्टेलर साइज़ के तारों के अंत में उत्पन्न होते हैं। जब एक महान तारा अपनी ऊर्जा संसाधित करता है, तो उसकी संरचना एक ब्लैक होल की रूप में परिवर्तित हो सकती है।
  2. सुपरमैसिव ब्लैक होल (Supermassive Black Holes): ये ब्लैक होल गैलेक्सी के केंद्र में पाए जाते हैं और इस प्रकार के होते हैं कि उनका भार सौरमंडल के हजारों सूर्यों के समान होता है।
  3. इंटर्मीडिएट-मास ब्लैक होल (Intermediate-Mass Black Holes): ये ब्लैक होल स्टेलर ब्लैक होल और सुपरमैसिव ब्लैक होल के बीच के भार के होते हैं। इसकी अधिकतम भार सौरमंडल के कुछ हजार सूर्यों के समान हो सकती है।
  4. प्राइमोर्डियल ब्लैक होल (Primordial Black Holes): इन ब्लैक होल की मान्यता तब होती है जब ब्रह्मांड के प्रारंभिक दिनों में ग्रेविटेशनल क्यूबलेटीयों के पार भार संकुचित होता है।

क्या हमें ब्लैक होल से कोई खतरा है

हाँ, ब्लैक होल से सीधा संपर्क होने पर वह बहुत ही खतरनाक हो सकता है, लेकिन ऐसा होने की संभावना बहुत ही कम है। ब्लैक होल का गुरुत्वाकर्षण इतना शक्तिशाली होता है कि चाहे वह प्रकाश हो या किसी अन्य पदार्थ, सभी कुछ इसके अंदर आकर्षित होता है। इसका मतलब है कि यदि कोई वस्तु इसकी सीमा के पास भी आये, तो वह ब्लैक होल के अंदर खींच ली जाएगी और उसके बाहर निकलने का कोई संभावना नहीं होती।

FAQ’s

ब्लैक होल क्या है

ब्लैक होल एक ऐसा खगोलिक द्रव्यमान है जिसमें गुरुत्वाकर्षण इतना शक्तिशाली होता है कि इसमें फंसी हुई किसी भी वस्तु, चाहे वह प्रकाश हो या कुछ और, से बाहर नहीं निकल सकती। इसका मुख्य विशेषता है कि जब कोई पदार्थ इसकी सीमा या ‘घटना सीमा’(Event Horizon) पार करता है, तो वह इस ग्रहणी में स्वीकार्य नहीं होता और अनंतर, इसके अन्दर खींच लिया जाता है।

ब्लैक होल की पहली तस्वीर

ब्लैक होल की पहली सीधी तस्वीर 10 अप्रैल, 2019 को सार्वजनिकता में प्रकट की गई थी। इस ऐतिहासिक तस्वीर को इवेंट होराइज़न टेलीस्कोप (EHT)जैसी टेक्नोलॉजी का उपयोग करके कैप्चर किया था

ब्लैक होल के प्रकार

1. स्टेलर ब्लैक होल (Stellar Black Holes): ये वह ब्लैक होल होते हैं जो स्टेलर साइज़ के तारों के अंत में उत्पन्न होते हैं। जब एक महान तारा अपनी ऊर्जा संसाधित करता है, तो उसकी संरचना एक ब्लैक होल की रूप में परिवर्तित हो सकती है।

2. सिंगुलैरिटी: ब्लैक होल के केंद्र में सिंगुलैरिटी होता है, जो एक अत्यंत घना बिंदु है जहाँ गुरुत्वाकर्षण बेहद तीव्र होता है।

इंटर्मीडिएट-मास ब्लैक होल (Intermediate-Mass Black Holes): ये ब्लैक होल स्टेलर ब्लैक होल और सुपरमैसिव ब्लैक होल के बीच के भार के होते हैं। इसकी अधिकतम भार सौरमंडल के कुछ हजार सूर्यों के समान हो सकती है।

प्राइमोर्डियल ब्लैक होल (Primordial Black Holes): इन ब्लैक होल की मान्यता तब होती है जब ब्रह्मांड के प्रारंभिक दिनों में ग्रेविटेशनल क्यूबलेटीयों के पार भार संकुचित होता है।

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