शीतऋतु में भारत से देखेगए12 नक्षत्र (Constellation)

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Introduction

नक्षत्र (Constellations) आसमान पर दिखने वाले तारों के समूह होते हैं, जिन्हें हम किसी खास आकृति या चित्र की तरह देखते हैं। ये आकृतियां अक्सर जानवरों, पौराणिक पात्रों या वस्तुओं से मिलती-जुलती हैं। आज दुनियाभर में 88 मान्यता प्राप्त नक्षत्र हैं!

ये नक्षत्र (Constellations) सिर्फ हमें आसमान की सुंदरता का आनंद नहीं कराते बल्कि प्राचीन काल से ही रास्ते खोजने और समय का पता लगाने में भी हमारी मदद करते रहे हैं।

यहाँ नक्षत्रों (Constellations) के बारे में कुछ और रोचक बातें हैं:

  • नक्षत्रों(Constellations) में दिखने वाले तारे असल में एक-दूसरे के पास नहीं होते हैं, वे सिर्फ हमें पृथ्वी से देखने पर ही साथ लगते हैं। ये अलग-अलग दूरी पर और दिशा में हो सकते हैं।
  • प्राचीन संस्कृतियों ने नक्षत्रों (Constellation) को अलग-अलग नाम दिए हैं, जैसे महाभारत में 27 नक्षत्रों का वर्णन मिलता है। आज के आधुनिक नक्षत्रों के नाम अधिकतर यूनानी मिथकों से लिए गए हैं।
  • खगोलविद आज भी तारों और आकाशीय वस्तुओं को स्थान निर्धारित करने के लिए नक्षत्रों का उपयोग करते हैं।
  • कुछ नक्षत्र(Constellation) हमेशा क्षितिज के ऊपर दिखाई देते हैं, इन्हें ध्रुवीय नक्षत्र(Polar Constellation) कहते हैं। जैसे, भारत में सर्दियों में उत्तर ध्रुव तारामंडल दिखाई देता है।
सर्दी के मौसम में भारत से देखे गए 12 नक्षत्र(Constellations)

Frequently Ask Questions (FAQ’s)

  1. सर्दियों के मौसम में भारत से कितने तारामंडल दिखाई देते हैं?
  2. भारतीय संस्कृति में नक्षत्रों का महत्व है ?

नक्षत्रों (Constellation) का इतिहास

नक्षत्रों (Constellation) का इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा हुआ है और विभिन्न संस्कृतियों में उनकी अपनी अनूठी कहानियां और महत्व हैं।

प्रारंभिक काल: क्षत्रों के बारे में मानव जाति का ज्ञान सदियों पुराना है। शुरुआती मनुष्यों ने रात के आसमान को तारों के समूहों से सजा हुआ देखा और उन्हें अर्थ देने की कोशिश की।

Ancient people Watching Night Sky

उन्होंने इन समूहों को जानवरों, पौराणिक पात्रों और वस्तुओं की आकृतियों में देखा और उन्हें नाम दिए। इन नामों और कहानियों का इस्तेमाल समय का पता लगाने, मौसम की भविष्यवाणी करने और रास्ते खोजने के लिए किया जाता था।

विभिन्न संस्कृतियों के नक्षत्र

  • दुनिया भर की विभिन्न संस्कृतियों ने अपने स्वयं के नक्षत्रों का निर्माण किया है।
  • उदाहरण के लिए, मेसोपोटामिया में लोग ज़ोडिएक के 12 नक्षत्रों का इस्तेमाल करते थे, जबकि चीन में 28 नक्षत्रों का एक सिस्टम था।
  • भारत में, नक्षत्रों को 27 नक्षत्रों में विभाजित किया गया है, जिन्हें महाभारत जैसे ग्रंथों में वर्णित किया गया है। इन नक्षत्रों का हिंदू धर्म और ज्योतिष में बहुत महत्व है।

यूनानी नक्षत्र(Greek Mithology) और उनका प्रभाव

  • यूनानी खगोलविदों ने नक्षत्रों का एक व्यापक और व्यवस्थित सिस्टम विकसित किया, जो आज भी दुनिया भर में इस्तेमाल किया जाता है।
  • उन्होंने 48 नक्षत्रों की पहचान की और उन्हें नाम दिए, जो ज्यादातर यूनानी मिथकों से लिए गए थे।
  • यूनानी नक्षत्रों का रोमन साम्राज्य के माध्यम से पूरे यूरोप में प्रसार हुआ और अंततः दुनिया भर में अपनाया गया।

आधुनिक नक्षत्र:

  • 20वीं सदी की शुरुआत में, अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU) ने आधिकारिक तौर पर 88 नक्षत्रों को मान्यता दी।

सर्दियों के मौसम में भारत से 12 तारामंडल दिखाई देते हैं!

  • उत्तरी ध्रुव तारामंडल North Pole Constellation
  • महाश्वेत Canis Major Constellation
  • कश्यप Cassiopeia Constellation
  • मृगशीर्ष Orion Constellation
  • मिथुन Gemini Constellation
  • कर्कट Cancer Constellation
  • सिंह Leo Constellation
  • कन्या Virgo Constellation
  • तुला Libra Constellation
  • वृश्चिक Scorpion Constellation
  • धनु Sagittarius Constellation
  • मीन Pisces Constellation

आप इन तारामंडलों को आसानी से देख सकते हैं यदि आप रात में किसी खुले मैदान में जाते हैं और आकाश की ओर देखते हैं। सर्दियों के मौसम में आसमान साफ होता है, इसलिए तारों को देखना और भी आसान हो जाता है।

1.उत्तरी ध्रुव तारामंडल (Uttari Dhruv Tara Mandal)

North Pole Constellation

उत्तरी ध्रुव तारामंडल (Uttari Dhruv Tara Mandal) आकाश का एक छोटा सा तारामंडल है जो उत्तरी गोलार्ध में स्थित है। यह ध्रुव तारे का घर है, जो पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव के पास स्थित एक तारा है।

उत्तरी ध्रुव तारामंडल में 7 तारे होते हैं, जिनमें से सबसे चमकीला तारा ध्रुव तारा (Polaris) है। ध्रुव तारा एक F7 श्रेणी का पीला दानव तारा है जो पृथ्वी से लगभग 434 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है। यह तारा पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव के बहुत करीब है, इसलिए यह हमेशा उत्तरी गोलार्ध में देखने योग्य होता है।

ध्रुव तारा एक महत्वपूर्ण दिशानिर्देशक तारा है। यह नाविकों और अन्य लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ बिंदु है जो उत्तर दिशा की ओर जाना चाहते हैं।

उत्तरी ध्रुव तारामंडल की पहचान करना आसान है। ध्रुव तारा बिग डिपर (Ursa Major) तारामंडल के दो सबसे बाहरी तारों को मिलाने वाली रेखा के अंत में स्थित है। यदि आप बिग डिपर को ढूंढ सकते हैं, तो आप आसानी से ध्रुव तारे को भी ढूंढ सकते हैं।

उत्तरी ध्रुव तारामंडल का महत्व प्राचीन काल से ही रहा है। कई संस्कृतियों में, ध्रुव तारे को एक दिव्य प्राणी या भगवान माना जाता था। उदाहरण के लिए, प्राचीन रोमनों ने ध्रुव तारे को पोसीडॉन, समुद्र का देवता, के साथ पहचाना।

आज भी, उत्तरी ध्रुव तारामंडल लोगों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है। यह हमें ब्रह्मांड की सुंदरता और हमारे स्थान की याद दिलाता है।

यहाँ उत्तरी ध्रुव तारामंडल के बारे में कुछ रोचक तथ्य दिए गए हैं:

  • ध्रुव तारा पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव के बहुत करीब है, इसलिए यह हमेशा उत्तरी गोलार्ध में देखने योग्य होता है।
  • ध्रुव तारा एक महत्वपूर्ण दिशानिर्देशक तारा है। यह नाविकों और अन्य लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ बिंदु है जो उत्तर दिशा की ओर जाना चाहते हैं।
  • उत्तरी ध्रुव तारामंडल की पहचान करना आसान है। ध्रुव तारा बिग डिपर तारामंडल के दो सबसे बाहरी तारों को मिलाने वाली रेखा के अंत में स्थित है।
  • उत्तरी ध्रुव तारामंडल का महत्व प्राचीन काल से ही रहा है। कई संस्कृतियों में, ध्रुव तारे को एक दिव्य प्राणी या भगवान माना जाता था।

2.महाश्वेत (Canis Major Constellation)

Canis Major

महाश्वेत (Canis Major) आकाश का एक बड़ा तारामंडल है जो उत्तरी गोलार्ध में स्थित है। यह रात के आसमान का सबसे चमकीला तारा, व्याध तारा (Sirius), का घर है।

महाश्वेत तारामंडल में 88 तारे होते हैं, जिनमें से सबसे चमकीला व्याध तारा है। व्याध तारा एक A1 श्रेणी का नीला दानव तारा है जो पृथ्वी से लगभग 8.6 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है। यह तारा रात के आसमान का सबसे चमकीला तारा है और इसे अक्सर “द स्टार ऑफ द हंड” के रूप में जाना जाता है।

महाश्वेत तारामंडल में अन्य उल्लेखनीय तारों में शामिल हैं:

  • अर्कातुरस (Arcturus), एक K1 श्रेणी का लाल दानव तारा जो पृथ्वी से लगभग 37 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है।
  • मिरा (Mira), एक मिरा तारा जो अपनी चमक में नियमित रूप से बदलता रहता है।
  • ग्रेगोर (Gregor), एक द्वैध तारा प्रणाली जिसमें एक लाल और एक नीला तारा शामिल है।

महाश्वेत तारामंडल की पहचान करना आसान है। व्याध तारा आकाश में सबसे चमकदार तारा है और इसे आसानी से देखा जा सकता है। यदि आप व्याध तारे को ढूंढ सकते हैं, तो आप आसानी से महाश्वेत तारामंडल के अन्य तारों को भी ढूंढ सकते हैं।

महाश्वेत तारामंडल का महत्व प्राचीन काल से ही रहा है। कई संस्कृतियों में, व्याध तारे को एक दिव्य प्राणी या भगवान माना जाता था। उदाहरण के लिए, प्राचीन मिस्र में, व्याध तारे को ओरियन, एक शिकारी देवता, के साथ पहचाना जाता था।

आज भी, महाश्वेत तारामंडल लोगों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है। यह हमें ब्रह्मांड की सुंदरता और हमारे स्थान की याद दिलाता है।

3.कश्यप (Cassiopeia)

Cassiopeia Constellation

कश्यप (Cassiopeia) आकाश का एक तारामंडल है जो उत्तरी गोलार्ध में स्थित है। यह W के आकार का एक बड़ा और चमकीला तारामंडल है जो आसानी से पहचाना जा सकता है।

कश्यप तारामंडल में 58 तारे होते हैं, जिनमें से सबसे चमकीला तारा अल्फ़ा कैसियोपेया (Alpha Cassiopeiae) है। अल्फ़ा कैसियोपेया एक F5 श्रेणी का पीला दानव तारा है जो पृथ्वी से लगभग 240 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है।

कश्यप तारामंडल की पहचान करना आसान है। उत्तरी ध्रुव तारे को ढूंढने के लिए, आप कश्यप तारामंडल की मदद ले सकते हैं। कश्यप तारामंडल के दो सबसे चमकदार तारों को मिलाने वाली रेखा उत्तरी ध्रुव तारे की ओर जाती है।

कश्यप तारामंडल का महत्व प्राचीन काल से ही रहा है। कई संस्कृतियों में, कश्यप तारे को एक दिव्य प्राणी या भगवान माना जाता था। उदाहरण के लिए, प्राचीन यूनान में, कश्यप तारे को कैसियोपेया, एक राजा की पत्नी, के साथ पहचाना जाता था।

आज भी, कश्यप तारामंडल लोगों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है। यह हमें ब्रह्मांड की सुंदरता और हमारे स्थान की याद दिलाता है।

4.मृगशीर्ष ( Orion Constellation)

Orion Constellation

Photo Was Taken By Just Using Mobile Camera and Tripod

मृगशीर्ष (Mrigshirsa) आकाश का एक तारामंडल है जो उत्तरी गोलार्ध में स्थित है। यह वृष और मिथुन राशियों को जोड़ने वाला एक छोटा सा तारामंडल है।

मृगशीर्ष तारामंडल में 4 तारे होते हैं, जिनमें से सबसे चमकीला तारा बीटा मृगशीर्ष (Beta Arietis) है। बीटा मृगशीर्ष एक A5 श्रेणी का नीला तारा है जो पृथ्वी से लगभग 120 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है।

मृगशीर्ष तारामंडल की पहचान करना आसान है। यह हिरण के सिर के आकार का एक छोटा सा तारामंडल है जो ओरियन तारामंडल के पास स्थित है।

मृगशीर्ष तारामंडल का महत्व प्राचीन काल से ही रहा है। कई संस्कृतियों में, मृगशीर्ष तारे को एक दिव्य प्राणी या भगवान माना जाता था। उदाहरण के लिए, प्राचीन मिस्र में, मृगशीर्ष तारे को ओसिरिस, एक देवता, के साथ पहचाना जाता था।

आज भी, मृगशीर्ष तारामंडल लोगों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है। यह हमें ब्रह्मांड की सुंदरता और हमारे स्थान की याद दिलाता है।

5.मिथुन (Gemini Constellation)

Gemini Constellation

मिथुन तारामंडल में 73 तारे होते हैं, जिनमें से सबसे चमकीला तारा कैस्टर (Castor) है। कैस्टर एक छह-तारा मंडल है जो पृथ्वी से लगभग 50 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है।

मिथुन तारामंडल की पहचान करना आसान है। यह दो जुड़वां बच्चों के आकार का एक बड़ा तारामंडल है जो ओरियन तारामंडल के पास स्थित है।

मिथुन तारामंडल का महत्व प्राचीन काल से ही रहा है। कई संस्कृतियों में, मिथुन तारे को एक दिव्य प्राणी या भगवान माना जाता था। उदाहरण के लिए, प्राचीन ग्रीस में, मिथुन तारे को कस्तोर और पोलक्स, दो जुड़वां भाइयों, के साथ पहचाना जाता था।

आज भी, मिथुन तारामंडल लोगों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है। यह हमें ब्रह्मांड की सुंदरता और हमारे स्थान की याद दिलाता है।

6.कर्कट (Cancer Constellation)

Cancer Constellation

कर्कट (Cancer) आकाश का एक तारामंडल है जो उत्तरी गोलार्ध में स्थित है। यह एक छोटा सा तारामंडल है जो केकड़े के आकार का है।

कर्कट तारामंडल में 60 तारे होते हैं, जिनमें से सबसे चमकीला तारा अल्फ़ा कैंसर (Alpha Cancri) है। अल्फ़ा कैंसर एक G8 श्रेणी का पीला तारा है जो पृथ्वी से लगभग 42 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है।

कर्कट तारामंडल की पहचान करना आसान है। यह केकड़े के आकार का एक छोटा सा तारामंडल है जो बिग डिपर तारामंडल के पास स्थित है।

कर्कट तारामंडल का महत्व प्राचीन काल से ही रहा है। कई संस्कृतियों में, कर्कट तारे को एक दिव्य प्राणी या भगवान माना जाता था। उदाहरण के लिए, प्राचीन मिस्र में, कर्कट तारे को ओसिरिस, एक देवता, के साथ पहचाना जाता था।

आज भी, कर्कट तारामंडल लोगों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है। यह हमें ब्रह्मांड की सुंदरता और हमारे स्थान की याद दिलाता है।

7.सिंह (Leo Constellation)

Leo Constellation

सिंह (Leo) आकाश का एक तारामंडल है जो उत्तरी गोलार्ध में स्थित है। यह राशिचक्र का पांचवां तारामंडल है और गर्मियों के मौसम का प्रतिनिधित्व करता है।

सिंह तारामंडल में 92 तारे होते हैं, जिनमें से सबसे चमकीला तारा अल्फ़ा लियोनिस (Alpha Leonis) है। अल्फ़ा लियोनिस एक B1 श्रेणी का नीला दानव तारा है जो पृथ्वी से लगभग 250 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है।

सिंह तारामंडल की पहचान करना आसान है। यह एक शेर के आकार का एक बड़ा तारामंडल है जो बिग डिपर तारामंडल के पास स्थित है।

सिंह तारामंडल का महत्व प्राचीन काल से ही रहा है। कई संस्कृतियों में, सिंह तारे को एक दिव्य प्राणी या भगवान माना जाता था। उदाहरण के लिए, प्राचीन मिस्र में, सिंह तारे को शेर, एक देवता, के साथ पहचाना जाता था।

आज भी, सिंह तारामंडल लोगों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है। यह हमें ब्रह्मांड की सुंदरता और हमारे स्थान की याद दिलाता है।

यहाँ सिंह तारामंडल के बारे में कुछ रोचक तथ्य दिए गए हैं:

  • सिंह तारामंडल का नाम लैटिन शब्द “लियो” से लिया गया है जिसका अर्थ है “शेर”।
  • सिंह तारामंडल का शेर का आकार एक मजबूत और शक्तिशाली जानवर का प्रतिनिधित्व करता है।
  • सिंह तारामंडल में कई द्वैध तारे और अन्य दिलचस्प खगोलीय वस्तुएं हैं।

8.कन्या (Virgo Constellation)

Virgo Constellation

कन्या (Virgo) आकाश का एक तारामंडल है जो उत्तरी गोलार्ध में स्थित है। यह राशिचक्र का छठा तारामंडल है और फसल कटाई के मौसम का प्रतिनिधित्व करता है।

कन्या तारामंडल में 110 तारे होते हैं, जिनमें से सबसे चमकीला तारा स्पाइका (Spica) है। स्पाइका एक B2 श्रेणी का नीला दानव तारा है जो पृथ्वी से लगभग 260 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है।

कन्या तारामंडल की पहचान करना आसान है। यह एक कुंवारी महिला के आकार का एक बड़ा तारामंडल है जो ओरियन तारामंडल के पास स्थित है।

कन्या तारामंडल का महत्व प्राचीन काल से ही रहा है। कई संस्कृतियों में, कन्या तारे को एक दिव्य प्राणी या भगवान माना जाता था। उदाहरण के लिए, प्राचीन ग्रीस में, कन्या तारे को देवी डेमेटर, कृषि की देवी, के साथ पहचाना जाता था।

आज भी, कन्या तारामंडल लोगों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है। यह हमें ब्रह्मांड की सुंदरता और हमारे स्थान की याद दिलाता है।

9.तुला (Libra Constellation)

Libra Constellation

तुला (Libra) आकाश का एक तारामंडल है जो उत्तरी गोलार्ध में स्थित है। यह राशिचक्र का सातवां तारामंडल है और शरद ऋतु का प्रतिनिधित्व करता है।

तुला तारामंडल में 59 तारे होते हैं, जिनमें से सबसे चमकीला तारा अल्फ़ा लीब्राए (Alpha Librae) है। अल्फ़ा लीब्राए एक K2 श्रेणी का पीला तारा है जो पृथ्वी से लगभग 77 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है।

तुला तारामंडल की पहचान करना आसान है। यह एक तराजू के आकार का एक छोटा सा तारामंडल है जो बिग डिपर तारामंडल के पास स्थित है।

तुला तारामंडल का महत्व प्राचीन काल से ही रहा है। कई संस्कृतियों में, तुला तारे को एक दिव्य प्राणी या भगवान माना जाता था। उदाहरण के लिए, प्राचीन मिस्र में, तुला तारे को मात, न्याय की देवी, के साथ पहचाना जाता था।

आज भी, तुला तारामंडल लोगों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है। यह हमें ब्रह्मांड की सुंदरता और हमारे स्थान की याद दिलाता है।

10.वृश्चिक (Scorpion Constellation)

Scorpion Constellation

वृश्चिक तारामंडल राशिचक्र का आठवां तारामंडल है। यह आकाशगंगा के दक्षिणी भाग में स्थित है और यह एक बड़ा तारामंडल है जिसमें 160 से अधिक तारे हैं।

वृश्चिक तारामंडल का सबसे चमकीला तारा ज्येष्ठा है। ज्येष्ठा एक लाल दानव तारा है जो पृथ्वी से लगभग 600 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है।

वृश्चिक तारामंडल की पहचान करना आसान है। यह एक बिच्छु के आकार का एक बड़ा तारामंडल है।

वृश्चिक तारामंडल का महत्व प्राचीन काल से ही रहा है। कई संस्कृतियों में, वृश्चिक तारे को एक दिव्य प्राणी या भगवान माना जाता था। उदाहरण के लिए, प्राचीन मिस्र में, वृश्चिक तारे को सेट, अंधेरे और अंधकार के देवता, के साथ पहचाना जाता था।

आज भी, वृश्चिक तारामंडल लोगों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है। यह हमें ब्रह्मांड की सुंदरता और हमारे स्थान की याद दिलाता है।

11.धनु (Sagittarius Constellation)

Sagittarius Constellation

धनु (Sagittarius) आकाश का एक तारामंडल है जो उत्तरी गोलार्ध में स्थित है। यह राशिचक्र का नौवां तारामंडल है और शीत ऋतु का प्रतिनिधित्व करता है।

धनु तारामंडल में 80 से अधिक तारे होते हैं, जिनमें से सबसे चमकीला तारा अल्फ़ा सॅजीटेरियस (Alpha Sagittarii) है। अल्फ़ा सॅजीटेरियस एक K5 श्रेणी का पीला तारा है जो पृथ्वी से लगभग 26 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है।

धनु तारामंडल की पहचान करना आसान है। यह एक धनुर्धारी के आकार का एक बड़ा तारामंडल है।

धनु तारामंडल का महत्व प्राचीन काल से ही रहा है। कई संस्कृतियों में, धनु तारे को एक दिव्य प्राणी या भगवान माना जाता था। उदाहरण के लिए, प्राचीन ग्रीस में, धनु तारे को हर्मिस, संचार और व्यापार के देवता, के साथ पहचाना जाता था।

आज भी, धनु तारामंडल लोगों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है। यह हमें ब्रह्मांड की सुंदरता और हमारे स्थान की याद दिलाता है।

यहाँ धनु तारामंडल के बारे में कुछ रोचक तथ्य दिए गए हैं:

  • धनु तारामंडल का नाम संस्कृत शब्द “धनु” से लिया गया है जिसका अर्थ है “धनुष”।
  • धनु तारामंडल का धनुर्धारी का आकार लक्ष्य और उद्देश्य का प्रतीक है।
  • धनु तारामंडल में कई द्वैध तारे और अन्य दिलचस्प खगोलीय वस्तुएं हैं।

12.मीन (Pisces Constellation)

Pisces Constellation

मीन (Pisces) आकाश का एक तारामंडल है जो उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध दोनों में स्थित है। यह राशिचक्र का बारहवां और अंतिम तारामंडल है।

मीन तारामंडल में 88 से अधिक तारे होते हैं, जिनमें से सबसे चमकीला तारा अल्फ़ा पिस्किस (Alpha Piscium) है। अल्फ़ा पिस्किस एक K3 श्रेणी का पीला तारा है जो पृथ्वी से लगभग 140 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है।

मीन तारामंडल की पहचान करना आसान है। यह दो मछलियों के आकार का एक बड़ा तारामंडल है।

मीन तारामंडल का महत्व प्राचीन काल से ही रहा है। कई संस्कृतियों में, मीन तारे को एक दिव्य प्राणी या भगवान माना जाता था। उदाहरण के लिए, प्राचीन मिस्र में, मीन तारे को ओसिरिस, मृत्यु और पुनर्जन्म के देवता, के साथ पहचाना जाता था।

आज भी, मीन तारामंडल लोगों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है। यह हमें ब्रह्मांड की सुंदरता और हमारे स्थान की याद दिलाता है।

Frequently Ask Questions (FAQ’s)

सर्दियों के मौसम में भारत से कितने तारामंडल दिखाई देते हैं?

यदि आकाश साफ़ है तो आप 12 तारामंडल देख सकते हैं

भारतीय संस्कृति में नक्षत्रों का महत्व है ?

हाँ बहुत ज्यादा

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