इंटरमिटेंट फास्टिंग: स्वस्थ जीवन की ओर एक कदम, लाभ, हानियाँ, और 5 मिथ्याएँ

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इंटरमिटेंट फास्टिंग

इंटरमिटेंट फास्टिंग: अर्थ और प्रकार

इंटरमिटेंट फास्टिंग एक आहारी प्रणाली है जो आहार लेने और उपवास के बीच नियमित अंतरालों को परिभाषित करती है। इसका लक्ष्य शरीर को निर्मित कैलोरी से बाहर जाने का एक विशिष्ट समय देना है, जिससे विभिन्न शारीरिक और मानसिक लाभ हो सकता है। यह विशेष रूप से शरीर की प्रक्रियाओं को सुधारकर वजन नियंत्रित करने और आम तौर से स्वस्थ रहने में मदद कर सकती है।

प्रकार:

  1. 16/8 फास्टिंग:
    • इसमें रोजाना 16 घंटे का उपवास और उसके बाद 8 घंटे का समय होता है जब आप आवश्यक भोजन कर सकते हैं। यह फास्टिंग का सबसे सामान्य प्रकार है और लोग इसे आसानी से अनुसरण कर सकते हैं।
  2. 12/12 फास्टिंग:
    • इसमें रोजाना 12 घंटे का उपवास होता है, जिसके बाद 12 घंटे के दौरान आपको आहार मिलता है। यह शुरुआती आधार के लिए उपयुक्त हो सकता है और आमतौर पर स्वस्थ जीवनशैली को बनाए रखने के लिए काफी है।
  3. 20/4 फास्टिंग:
    • इस प्रकार की फास्टिंग में रोजाना 20 घंटे तक का उपवास होता है, जिसके बाद केवल 4 घंटे का समय होता है जब आपको भोजन करने की अनुमति होती है। यह अधिकतम लाभ प्रदान करने की कोशिश करने वाले व्यक्तियों के लिए है लेकिन इसे ध्यानपूर्वक अनुसरण करना चाहिए।
  4. 24-हफ्ते का व्रत:
    • इस प्रकार की फास्टिंग में व्यक्ति रोजाना 24 घंटे के बाद भी कोई भोजन नहीं करता है। यह अधिक अनुभवी फास्टिंग प्रणाली है और इसे सावधानीपूर्वक करना चाहिए।

इस फास्टिंग के ये विभिन्न प्रकार व्यक्तिगत आवश्यकताओं और लक्ष्यों के आधार पर अनुसरण किए जा सकते हैं। यह व्यक्तिगत स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल पर निर्भर करता है, और सही तरीके से अनुसरण करने पर इससे साकारात्मक परिणाम हो सकते हैं।

लाभ और हानियाँ

लाभ:

  1. वजन नियंत्रण:
    • इस फास्टिंग से वजन को नियंत्रित करना संभव है। अधिक समय तक नहीं खाने से कैलोरी संपत्ति कम होती है, जिससे वजन कम हो सकता है।
  2. शरीर का साफ़ होना:
    • अधिक समय तक नहीं खाने से शरीर को अधिक समय मिलता है पाचन प्रक्रिया को साफ़ करने के लिए। यह आमतौर पर आपकी पाचन प्रणाली को सुधारने में मदद करता है और शारीरिक आशुद्धियों को बाहर निकालने में मदद कर सकता है।
  3. मानसिक स्वास्थ्य का सुधार:
    • इस फास्टिंग से शारीरिक साफी के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य में भी सुधार हो सकता है। शारीरिक आचरण में परिवर्तन से मानसिक चेतना में भी बदलाव आ सकता है।

हानियाँ:

  1. नकारात्मक प्रभाव:
    • कुछ लोगों को इंटरमिटेंट फास्टिंग करने से गुस्सा, थकान, या चक्कर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। खुद को अधिक समय तक रोकने से ऐसे प्रभाव हो सकते हैं।
  2. स्वास्थ्य संबंधित रिस्क:
    • नियमित रूप से अधिक समय तक भूखे रहना स्वास्थ्य के लिए अनुकूल नहीं हो सकता, खासकर गर्भवती महिलाएं और बच्चे। इससे शरीर को आवश्यक पोषण नहीं मिलता, जिससे अनेक स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
  3. विशिष्ट व्यक्तिगत परिस्थितियाँ:
    • इंटरमिटेंट फास्टिंग सभी के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता, विशेषकर व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थितियों या चिकित्सकीय समस्याओं में रहने वाले व्यक्तियों को सावधानीपूर्वक इसे अनुसरण करना चाहिए।

इस प्रकार, इस फास्टिंग के लाभ और हानियाँ का विश्लेषण करना महत्वपूर्ण है ताकि व्यक्ति समझ सके कि यह उनके लिए उपयुक्त है या नहीं। सही तरीके से अनुसरण किया जाए, तो इंटरमिटेंट फास्टिंग शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने में सहारा प्रदान कर सकता है।

दुष्प्रचार और मिथ्याएँ

इंटरमिटेंट फास्टिंग को लेकर कई भ्रांतियाँ और मिथ्याएँ हैं जो लोगों को इस स्वास्थ्य प्रणाली को अनुसरण करने से रोक सकती हैं। इन मिथ्याओं को समझकर, लोग इसका सही तरीके से लाभ उठा सकते हैं।

1. इंटरमिटेंट फास्टिंग से हमेशा के लिए वजन घटेगा।

मिथ्या: यह मिथ्या उत्पन्न होती है क्योंकि यह फास्टिंग एक लाभकारी आहारी प्रणाली है, लेकिन यह आपको अदिरुद्ध वजन कम करने में मदद नहीं कर सकता है। वजन कम करने के लिए भी सही आहार, नियमित व्यायाम, और स्वस्थ जीवनशैली की आवश्यकता होती है।

2. इंटरमिटेंट फास्टिंग सभी के लिए उपयुक्त नहीं है।

मिथ्या: यह मिथ्या है क्योंकि इस फास्टिंग को व्यक्तिगत अनुकूलन पर आधारित किया जाता है। व्यक्ति के लाइफस्टाइल, स्वास्थ्य स्तर, और मेडिकल कंडीशन्स के आधार पर इसे अनुसरण करना चाहिए।

3. इंटरमिटेंट फास्टिंग से कमजोरी होगी और थकान महसूस होगी।

मिथ्या: इस मिथ्या का खंडन करते हुए कह सकते हैं कि सही तरीके से इंटरमिटेंट फास्टिंग किया जाए तो यह कमजोरी नहीं, बल्कि ऊर्जा और ताजगी में वृद्धि कर सकता है।

4. इंटरमिटेंट फास्टिंग निराहारी जैसा है।

मिथ्या: यह निराहारी नहीं है, बल्कि यह खाद्य सीमा बनाए रखने की प्रक्रिया है जिसमें नियमित खाना-पीना के अंतरालों को ध्यानपूर्वक बनाए रखा जाता है।

5. इंटरमिटेंट फास्टिंग से शरीर को पूरा पोषण नहीं मिलता।

मिथ्या: इस मिथ्या का समापन करते हुए यह कह सकते हैं कि सही रूप से अनुसरण किया जाए तो इंटरमिटेंट फास्टिंग द्वारा शरीर को पूरा पोषण मिलता है और यह स्वास्थ्य को सुनिश्चित रूप से बनाए रखने में मदद करता है।

समापन

इंटरमिटेंट फास्टिंग एक शक्तिशाली स्वास्थ्य रणनीति है जो सही तरीके से अनुसरण करने पर अनेक लाभ प्रदान कर सकती है। हालांकि, इसे स्वयं को अच्छे से समझकर और पूर्व-चिकित्सक की सलाह लेकर ही अनुसरण करना चाहिए। इससे न केवल आपकी शारीरिक सेहत बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी सुधर सकता है, जिससे आप एक स्वस्थ और खुश जीवन जी सकते हैं।

Frequently Asked Questions (FAQ’s)

क्या इंटरमिटेंट फास्टिंग से वजन घटा जा सकता है?

हाँ।

क्या इंटरमिटेंट फास्टिंग सभी के लिए सुरक्षित है?

नहीं।

क्या इंटरमिटेंट फास्टिंग से थकान और कमजोरी हो सकती है?

नहीं।

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